मेरा मन जो कहता है
मन की भावनाओं को शब्दों में पिरोने की कोशिश करता हूँ .............
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दीप वार्ता
भोजपुरी संगह
Life&Literature@KIT
कानपूर ब्लोगर्स एसोसिएशन
Tuesday, September 1, 2026
मुक्तक
हम नहीं आसान हैं तुम तोड़ तो न पाओगे
लग गई आदत जो मेरी छोड़ तो न पाओगे
हम वो पत्थर हैं जो समझो डिग गए तो डिग गए
लाख दोगे चोट पर तुम फोड़ तो न पाओगे
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